ध्यान (Dhyana) है मृत्यु – मन की मृत्यु, मैं की मृत्यु, विचार का अंत| शुद्ध चैतन्य हो जाना, मगर दुर्भाग्य से आज के इस मॉडर्न एरा में ऐसा ध्यान मुग्ध हो पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है| हज़ारो योग पुरुष आये और चले गए लेकिन इस संसार में ध्यान के महत्व को बहुत ही कम लोगो ने समझा, ध्यान एक ऐसी सीढ़ी है जिससे आप जीवन के कई राज को आप उजागर कर सकते हो |

ध्यान से ही आप अपने भाग -धौड़ वाली जिंदगी से थोड़ा सा ब्रेक लेके आप लाइफ की सही अनुभूति को समझ सकते हो की क्यों मेरा जन्म हुआ? मैं इस संसार में क्यों आया? किस मकसद से मैं मनुष्य कुल में ही जन्मा? तो मैं जो आपसे आगे, जो कुछ भी कहूंगा वो बिल्कुल ही प्रैक्टिकल बातें होंगी, जो की इस प्रकार है –

1: जब भी आपका मन बेचैन हो जाये किसी भी काम को लेके या कोई भी लाइफ में प्रॉब्लम चल रही हो कुछ भी समझ ना आ रहा हो तो बस आप अपनी आँखे बंद कर लेना और जो थॉट्स आये आप के दिमाग़ में उसे बस आप महसूस करना वो एकदम से ही आएंगे और चले जायेंगे बस उस बिच आप सिर्फ और सिर्फ आप केवल अपनी सांसों पर ही अपना फोकस बनाये रखना और जैसे जैसे आप स्वसन दर के प्रति आप जितने ज्यादा जागरूक होंगे आप उतने ही अधिक सक्षम हो जाओगे, संसार की सबसे बड़ी खोज “ध्यान ” के प्रति जागरूक होना और वही जाग जाना||

2: ध्यानि हो तो “शिव ” जैसी हो| क्या अर्थ है इसका, ध्यान का अर्थ होता है – ना विचार, ना वासना, ना स्मृति, ना कल्पना||

ध्यान का अर्थ होता है सिर्फ और सिर्फ अपने भीतर होना, इसलिए “शिव” को मृत्यु का, विधवंश का, विनाश का देवता कहा गया है, क्यूंकि ध्यान विधवंश है – विधवंश है मन का, मन ही संसार है, मन ही सृजन है, मन ही सृष्टि है, मन गया की प्रलय  हो गयी | जो भी ध्यान में उतरता है उसकी प्रलय हो जाती है | जो भी ध्यान में उतरता है, उसके भीतर शिव का पदार्पण हो जाता है |

3: परमात्मा के लिए किसी मंदिर में जाने की जरुरत नहीं है| तुम जहाँ मौन हो गए वही वो मौजूद है| और जिस दिन तुम ऐसी स्थिति में पहुंच गए उसी दिन समझ लेना ” मैं का मुक्त होना ही मोक्ष है” यानि की आप ध्यान की चरम सुख यानि समाधी की और बढ़ चुके हो |

4: संसार का सबसे गहरा मंत्र है श्वास को भीतर आते -जाते हुए देखना क्यूंकि जिस दिन तुम ऐसा करने में महारत हासिल कर लो उसी क्षण समझ लेना तुम शून्य पर सवार हो चुके हो और उस दिन तुम ऐसा अनुभूति अपने भीतर पाओगे जो तुम्हे जन्मों – जन्मों से जिसकी तुम्हे तलाश थी और उस दिन तुम्हे पता चलेगा की ध्यान जैसा इस दुनिया में कोई चीज ही नहीं है जो तुम्हे आंतरिक तृप्ति देगी |

5: ध्यान एक ऐसी प्रकिया है जिसे कोई आपको बोलके या कह के आपको वो अनुभूति नहीं दे सकता जितनी अनुभूति आप खुद से ध्यान में समा के हो सकते हो ध्यान से आप अपने दिमाग़ को एक समय में एक चीज़ पर बड़ी ही आसानी से फोकस कर सकते हो और सबसे बड़ी बात ध्यान की यह है की अगर आप 3 दिन पूरी तरह से अपने मन को और अपने विचार को कम करने की कोशिश करें तो आप मस्तिष्क की एक अलग सीमा शक्ति को प्राप्त कर सकते हो |

लेखक- सुमित राजवार 

 

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